//एक ख़त माँ के नाम

एक ख़त माँ के नाम

माँ,

बहोत कुछ कहना है आपसे. जानती हूँ, जब कहना था तब एहसास नहीं हुआ. जब हुआ तो सुनने के लिए आप नहीं हो. पर आपकी मौजूदगी ना हो कर भी हर पल आपके होने का एहसास है. आपकी बातें, किस्से, आपका जिक्र न हो, ऐसा कोई दिन नहीं गुज़रता. सुना था लोग दुनिया से जाने के बाद सिर्फ यादों मे रह जाते हैं, पर न जाने क्यों आपसे जुडी हर बात मानो जैसे कल की ही बात हो|

माँ मेरी जन्नत

मैंने जन्नत तो नहीं पर आपको देखा है. “माँ” ये सिर्फ एक शब्द नहीं अपने आप मे एक पूरी दुनिया है. आज भी याद है मुझे वो दिन, आपका पार्थिव शरीर ले जाए जाने के बाद भी, वो जूते सिलने वाला मोची उसी जगह पे दो दिन तक बैठ के रोता रहा. बहोत मुश्किल से सबने समझा कर उसे जाने को कहा तो जाते जाते उसने कहा: आपकी ही नहीं मेरे सर से भी माँ का साया हट गया. उस दिन उसकी वय्था कोई नहीं समझ पाया. मैंने देखा था आपको, बिना काम के जूते चप्पलें उसे सिलने देते, जब तब रोटी भेजते, पापा से छुप कर उसे सर छुपाने की जगह देते. उन् दिनों ऐसे बहोत से लोग आते और आपसे जुडी अपनी बातें बताते. उन् दिनों बहोत सी बातों का एहसास हुआ, जिंदगी बहोत कुछ सीखा गयी.

औरत एक बेटी,एक पत्नी एक बहिन एक माँ, एक भाभी,एक ननद,एक दोस्त ऐसे कितने रिश्तों से जुडी होती है. मैंने हर रिश्ते को आपको बखूबी निभाते देखा है. कितनी सहजता, कितनी मिठास, कितना अपनापन आपके हर रिश्ते मे था. आज समझ आता है कितना कठिन है ये, जब आज मैं भी इन् रिश्तों मे बंधी हूँ.

आपका मेरी गलतियों पे समझाना, बार बार सही के लिये टोकना कितना खीजता था मुझे, पर आप कितनी धीरज थीं. हमारी हर छोटी बड़ी ख़ुशी का ख्याल रखना, हर बुराई से बचाना, एक ढाल बन खड़ी हो जाती थीं आप हर बुरी स्तिथि मे. आज जब मै भी एक माँ हूँ तो समझ आता है कितना कठिन है एक अच्छी माँ बनना. काश सब बातों के लिए शुक्रिया अदा कर पाती आपका.

पता है आपको, मुझे हमेशा लगता था की “माँ” कभी बीमार नहीं होती. क्योंकि आपको कभी अपनी तकलीफ बताते, आराम करते, देखा ही नहीं. आज समझ आता है कि जो हर वक़्त दुसरो का ख्याल रखते हैं वो अपनी तकलीफ नहीं देखा करते. अच्छी माँ, अच्छी बहू, अच्छी पत्नी, अच्छी बहन होने मे खुद को भूलना होता है, कितना त्याग है ये कोई देख नहीं पाता. काश आपसे कभी पूछ लिया होता आप कैसे हो?

माँ, मेरी पहली गुरु, पहली दोस्त, मेरी पहचान, मेरी जमीं का आसमाँ|

माँग लूँ यह मन्नत कि
फिर वही जहाँ मिले
फिर वही गोद
और फिर वही “माँ ” मिले